प्रदेश में 88 पॉजिटिव मरीज, 44 मुख्यमंत्री गहलोत के गृह जिले में, तीन की मौत भी





जोधपुर.मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला जोधपुर सबसे ज्यादा स्वाइन फ्लू पॉजिटिव और इससे होने वाली मौतों में प्रदेश में प्रथम हो गया है। हाल यह है कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू का आंकड़ा नए साल के तीन दिन में 88 है, वहीं अकेले जोधपुर में 44 व संभाग में 41 पॉजिटिव आए हैं। प्रदेश में सर्वाधिक तीन मौतें भी जोधपुर में ही हुई हैं। दूसरे स्थान पर जयपुर में 18 पॉजिटिव मरीज और जयपुर संभाग में 28 मरीज 3 दिन में पॉजिटिव आए हैं। जयपुर में फ्लू से काेई भी मौत नहीं हुई है।

  1. गुरुवार को डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबॉयोलॉजी लैब में 51 संदिग्धों के सैंपल लिए, जांच में 25 पॉजिटिव आए। वहीं लगातार तीसरे दिन एक और मरीज की मौत हो गई है। अगर गुरुवार के आंकड़े को भी जोड़ा जाए तो जोधपुर में अब तक 69 पॉजिटिव और 3 मौत हैं। उधर पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा बढ़ता देख मेडिकल कॉलेज ने आमजन जागरूकता के लिए उम्मेद अस्पताल के ऑडिटोरियम में पब्लिक लेक्चर का आयोजन किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू के लक्षण, बचाव और कब जांच की जरूरत है, आदि पर आमजन को जागरूक किया। सीएमएचओ डॉ. सुनील कुमार बिष्ट ने महामंदिर और मदेरणा कॉलोनी की डिस्पेंसरी में स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए नर्सिंग स्टाफ और एएनएम के द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जायजा लिया।

  2. गुरुवार को पॉजिटिव में जोधपुर के 18, पाली के 2, बाड़मेर के 2, नागौर के 2, जालोर का एक मरीज है। पॉजिटिव में महामंदिर के 20 वर्षीय युवक, पावटा के 62 वर्षीय बुजुर्ग, उदयमंदिर के 23 वर्षीय युवक, महामंदिर की 40 वर्षीय महिला, चांदपोल के 86 वर्षीय बुजुर्ग, मधुबन हाउसिंग बोर्ड की 65 वर्षीय महिला, रामेश्वर नगर की 48 वर्षीय महिला, 60 वर्षीय महिला, प्रतापनगर की महिला, चौपासनी के 39 वर्षीय पुरुष, गीता भवन की 33 वर्षीय महिला, मेड़ती गेट के 60 वर्षीय पुरुष, मदेरणा कॉलोनी की 33 वर्षीय महिला, चांदणा भाखर के 45 वर्षीय पुरुष, चौहाबो के 39 वर्षीय पुरुष, पाली की 50 वर्षीय महिला व 51 वर्षीय महिला, सिवाना निवासी 1 वर्षीय बच्ची, बालोतरा निवासी 40 वर्षीय महिला, बिलाड़ा के 38 वर्षीय पुरुष, नागौर की 45 वर्षीय महिला व 48 वर्षीय पुरुष, बावड़ी की 9 वर्षीय बच्ची, मथानिया की 34 वर्षीय महिला, सांचोर के 63 वर्षीय पुरुष पॉजिटिव आए। इनमें से रामेश्वर नगर 48 वर्षीय महिला ने दम तोड़ दिया।

  3. डॉक्टर से मिलें, वे उचित समझेंगे तो टेस्ट करवाएंगे, नहीं तो सीधे इलाज शुरु कर सकते हैं। ध्यान रखें कि सभी मरीजों को टेस्ट और इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। जरुरी है कि मरीज घर रहे और ज्यादा लोगों से नहीं मिले। खांसते और छींकते वक्त रुमाल या टिशू का इस्तेमाल करें। किसी भी वस्तु को छूने पर साबुन से हाथ धोएं। स्वाइन फ्लू का वैक्सीन हर कोई लगवा सकता है। इसे हर साल लगवाना पड़ता है। ज्यादा लंबी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों और वृद्ध, गर्भवती को और दो साल से छोटे बच्चों को वैक्सीन लगाना चाहिए।

  4. ये इंफ्लूएंजा वायरस से होता है। इसमें सर्दी जुकाम व बुखार होता है। कभी कभी कुछ मरीजों में गंभीर होकर जानलेवा भी हो सकती है। कम लोगों में गंभीर अवस्था बनती है। गंभीर होने की संभावना वृद्धों में, 2 साल से छोटे बच्चों में, सांस, हार्ट, गुर्दा, शुगर आदि लंबी बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों में ज्यादा होती है। गर्भवतियों में भी ज्यादा होती है।

  5. डरने की नहीं सतर्क रहने की जरूरत है। स्वाइन फ्लू के 99 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों का सिर्फ सर्दी जुकाम व बुखार ही होता है। जो खुद ठीक हो जाता है। कुछ प्रतिशत मरीजों में ही बढ़ने की आशंका रहती है। सर्दी कोई भी जुकाम-बुखार स्वाइन फ्लू हो सकता है। सभी का टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।

  6. मरीज के खांसते-छींकते वक्त रुमाल काम लें। दूसरा व्यक्ति ध्यान रखे कि जहां मरीज खांसी-छींक कर रहा है वहां किसी चीज को हाथ नहीं लगाएं। सामान्य और मरीज दोनों को ही बार-बार साबुन से हाथ धोने चाहिए। यह इस बीमारी से बचने का एक सबसे अच्छा तरीका है।

  7. मरीजों की बढ़ती संख्या संसाधनों की कमी या लापरवाही नहीं है, यह केवल आमजन में जागरूकता की कमी से है। जिन मरीजों की इम्युनिटी कम है, उन्हें यह वायरस गिरफ्त में ले रहा है। हल्की सर्दी-जुकाम होने पर आदमी घर रहकर इलाज नहीं लेता है, वह अनदेखा करता है। ऐसा हो तो घर पर ही रहकर इलाज ले और बाहर नहीं निकले तो 15 दिन में पॉजिटिव मरीजों पर रोक लगाई जा सकती है। यदि मरीज को पहले 48 घंटे में टेमीफ्लू दी जाए तो वह बीमारी पर पूरा असर करती है। लेकिन मरीज काफी देर से दवा और इलाज लेने अस्पताल आते हैं। दिल्ली पूना में हुई एक स्टडी में भी यह सामने आया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों में से 20 प्रतिशत ऐसे हैं जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हुई तो उनको फ्लू हुआ। वायरस के स्टेन में परिवर्तन शोध का विषय है।

    डॉ. आलोक गुप्ता,सीनियर प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग

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      88 Swine Flu Positive in State



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