जन राजनीति के पास ही है जन सवालों का समाधान-अखिलेन्द्र

सहकारीकरण ही बढ़ा सकता है उत्पादकता
राबर्ट्सगंज लोकसभा से स्वराज इंडिया समर्थित आइपीएफ प्रत्याशी पूर्व आईजी एस0 आर0 दारापुरी का चुनाव प्रचार तेज
विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार टीमें कर रही जनसम्पर्क

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़/अशोक केशरी

चंदौली। दलित-आदिवासी बाहुल्य राबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र की अपनी विशिष्टता है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटी जोतें है और आज भी कई इलाकों में हल बैल से खेती होती है। बड़ी आबादी की निर्भरता अभी भी जंगल पर है। यहां ऐसे दुर्गम क्षेत्र हैं जहां बिजली, पेय जल, सड़क, स्वास्थ्य जैसी न्यूनतम बुनियादी सुविधायें नहीं हैं। यहां उत्पादकता बेहद कम है। दूषित पानी पीने से हर साल बच्चों की मौतंे होती हैं। मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों से भी यहां हजारों नागरिकों की प्रति वर्ष इलाज के अभाव में मौतंे होती है। यहां के आदिवासी, दलित व ग्रामीण गरीबों, मजदूरों को जिंदा रखने और इनके श्रम की उत्पादकता बनाएं रखने के लिए अनिवार्य शर्त है कि यहां खेती का सहकारीकरण किया, स्थानीय सहकारी समितियों के द्वारा किसानों को सस्ता खाद, बीज आदि मुहैया कराया जाये, सिंचाई के पानी व उपज की खरीद की गारण्टी की जाये, किसानों को ब्याजरहित कर्ज दिया जाये, खनन को स्थानीय नागरिकों की सहकारी समितियों द्वारा कराया जाये, सहकारी समितियों के द्वारा वन विभाग की खाली पड़ी जमीनों पर फलदार वृक्षारोपण कराया जाये और उद्योगों में भी मजदूरों की सहकारी समितियां बना कर काम कराया जाये व उनकी प्रबंधन में हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाये। इसके लिए हम बराबर संघर्ष करते रहे और यह सच्चाई है कि इस अशांत क्षेत्र में हमारे राजनीतिक हस्तक्षेप ने ही यहां शांति, स्थिरता और जो कुछ भी विकास हुआ है, को सुनिश्चित किया है। यहां के सवालों का दल बदलू नेता और सत्ता में रहे दल नहीं बल्कि इस क्षेत्र में जारी जन राजनीति ही समाधान कर सकती है। यह बातें राबर्ट्सगंज लोकसभा से स्वराज इंडिया समर्थित आइपीएफ प्रत्याशी पूर्व आईजी एस0 आर0 दारापुरी के समर्थन में अपने दौरे में स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं। उन्होंने नौगढ़ व चकिया के दर्जनों गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में हमारी रिट पर हुए आदेश के बाद वनाधिकार कानून के तहत दाखिल दावों पर नये सिरे प्रक्रिया शुरू हुई है और जमीनों से बेदखली पर रोक लगी। यहां के आदिवासी अपनी मूल पहचान तक से वंचित हैं। मशहूर आदिवासी कोल को आज तक जनजाति का दर्जा नहीं मिला और आदिवासी धांगर के एससी दर्जे को भी छीन लिया गया। उन्होंने कहा कि यहां एक भी उन्नत बाजार नहीं है जबकि यहां भरपूर प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं जिनका इस्तेमाल कर विकसित बाजार बन सकता है। यहां खेती आधारित उद्योग भी लग सकते हैं जिनमें बड़े पैमाने पर स्थानीय नौजवानों को रोजगार मिल सकता है जिससे यहां हो रहे पलायन पर भी रोक लग सकती है।
उनके साथ मजदूर किसान मंच के जिला प्रभारी अजय राय,संयोजक रामनरायण राम संहसयोजक रामेश्वर प्रसाद,अमर बहादुर चौहान,नागेन्द्र चौहान ,लालजी चौहान आदि लोग रहे।

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