आक्रोशित ग्रामीणों ने पैंथर व उसे पकड़ने वाली टीम पर बोला हमला, भारी पथराव के बीच जिंदा जलाने का प्रयास

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जोधपुर. नागौर जिले के मूंडवा के समीप एक पैंथर को पकड़ने गई वन विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। पैंथर को पकड़ने के पश्चात सैकड़ों लोगों की भीड़ ने पैंथर व इसे बेहोश कर पकड़ने वाले डॉ, श्रवणसिंह राठौड़ को जिंदा जलाने का प्रयास किया। भारी पथराव के बीच वे अपनी टीम के साथ पैंथर को लेकर वहां से निकलने में कामयाब रहे, लेकिन चोटिल हो गए। जबकि पैंथर भी बुरी तरह से जख्मी हो गया।

मूंडवा क्षेत्र में कई दिन से घूम रहे पैंथर के कारण ग्रामीण दहशत में थे। इस पैंथर को पकड़ने के लिए जयपुर से बी एक टीम वहां पहुंची, लेकिन ग्रामीणों के उग्र व्यवहार को देख वापस लौट गई। इसके बाद पैंथर पकड़ने में माहिर माने जाने वाले डॉ. राठौड़ के नेतृत्व में एक टीम वहां पहुंची। पटेली गांव में पैंथर की उपस्थिति की सूचना पर उन्होंने वहां उसकी खोजबीन शुरू की।

इस दौरान वहां हजारों लोगों की भीड़ पहुंच गई। सभी ने हाथों में कुल्हाड़ी व अन्य हथियार थाम रखे थे। एक स्थान पर पैंथर नजर आने पर लोग उसे मारने के लिए भागे। इस दौरान जान बचाने के लिए पैंथर झाड़ियों में जाकर बैठ गया। डॉ. राठौड़ ने निशाना साध बेहोश करने का इंजेक्शन लगा दिया।

इस दौरान कुछ लोगों ने पैंथर पर हमला कर दिया। अपने बचाव में पैंथर ने अर्ध बेहोशी में दो लोगों पर हमला किया और एक पेड़ पर चढ़ गया। वहां मौजूद पुलिस व वन विभाग की टीम ने लोगों से पैंथर से दूर रहने की अपील की, लेकिन आक्रोशित लोग उसे मारने पर आमादा थे।

भारी भीड़ के बीच डॉ. राठौड़ ने उसे पेड़ से नीचे गिरा दिया। इस दौरान लोगों ने पैंथर व डॉ. राठौड़ पर हमला बोल दिया। लोगों ने उनके हाथ से ट्रेन्क्यूलाइजिंग गन को छिनने का भी प्रयास किया। भारी पथराव के बीच लोग दोनों को जिंदा जलाने के लिए चिल्लाने लगे। माहौल बिगड़ता देख पुलिस टीम वहां से खिसक गई।

भारी पथराव के बीच डॉ. राठौड़ ने बड़ी मुश्किल से बेहोश पैंथर को अपने वाहन में डाला और तेजी के साथ वहां से निकल गए। इस दौरान लोगों ने वाहन रोकने के लिए लगातार पथराव किया और करीब दो किलोमीटर तक उनका पीछा किया। पैंथर को जोधपुर लाया गया है। उसके शरीर पर कुल्हाड़ी का एक गहरा घाव होने के अलावा पत्थरों की कई चोट लगी है। वहीं डॉ. राठौड़ शरीर पर पत्थर लगने से चोटिल हो गए। उनका इलाज भी यहां चल रहा है।

अब तक 22 पैंथर पकड़ने के साथ सालाना सैकड़ों वन्यजीवों की जान बचाने वाले डॉ. राठौड़ ने कहा कि उन्होंने कभी इतना खराब नजारा नहीं देखा। लोगों का व्यवहार बहुत आहत करने वाला रहा। हम लोग उनकी रक्षा के लिए पैंथर को पकड़ने गए थे और वे हमारे ऊपर ही हमला करने लग गए।

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नागौर के मूंडवा क्षेत्र मे पेड़ पर लटका बेहोश पैंथर।


घायल पैंथर को बेहोश कर जोधपुर लाया गया।

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