तीसरा दिन शुक्रवार को सांध्य अर्घ्य के साथ नदियों, जलाशयों और तालाबों के किनारे रातभर बैठ करेंगी पूजा

तेज एक्सप्रेस न्यूज इब्राहीम


दुद्धी । बिहार और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश का सबसे प्रमुख त्‍योहार छठ पूजा के दूसरे दिन आज गुरुवार को ठढ़ उपास रखने के बाद संध्या काल में नदियों एवं जलाशयों और तालाबों के किनारे पहुँच कर वेदी बनाकर देर शाम तक बैठकर छठ मईया की गीत गाती रहीं।महिलाएं आज दूसरे दिन महिलाएं छठ घाट पहुँचकर स्नान करने के वेदी बनाई और सांध्य अर्घ्य देने के बाद देर शाम तक वेदी पर बैठ कर छठी मईया की पूजा अर्चना कर देर शाम अपने अपने घरों को लौट गई ।कस्बे के प्राचीन शिवाजी तालाब,कैलाश कुंज द्वार मल्देवा ,लाऊवा नदी,खजुरी शिव मंदिर, दिघुल ठेमा नदी तथा टेढ़ा छठ घाट सहित अन्य स्थानों पर छठ पूजा के लिए महिलाओं ने वेदी बनाई ।गुरुवार को छठ पूजा के दूसरे दिन प्राचीन शिवाजी तालाब पर छठ पूजा आयोजक समिति के आलावा सुरक्षा की दृष्टि से कोतवाल पंकज कुमार सिंह तथा एस आई संतोष सिंह मय फोर्स के साथ मौजूद रहे।

दुद्धी।हिंदू धर्म में यह पहला ऐसा त्‍योहार है जिसमें डूबते सूर्य की पूजा की जाती है. छठ के तीसरे दिन शाम यानी सांझ के अर्घ्‍य वाले दिन शाम के पूजन की तैयारियां की जाती हैं. इस बार शाम का अर्घ्‍य 20 नवंबर को है. इस दिन नदी, तालाब में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है तथा पूजा बेदी पर बैठकर रात बिताई जाती हैं और सुबह की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं.

चौथे दिन सूर्योदय अर्घ्य एवं पारन –

चौथे दिन सुबह के अर्घ्‍य के साथ छठ का समापन हो जाता है. सप्‍तमी तिथि 21 नवम्बर को सुबह सूर्योदय के समय भी सूर्यास्त वाली उपासना की प्रक्रिया को दोहराया जाता है. विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा जाता है और इस तरह छठ पूजा संपन्न होती है।