विधानपरिषद संविधान का प्रहरी – सुरेन्द्र अग्रहरि

तेज एक्सप्रेस न्यूज इब्राहीमi:
विधायी तन्त्र में अंकुश व संतुलन बनाए रखने का कार्य करती हैं विधानपरिषद — सुरेन्द्र अग्रहरि
[(महुली)सोनभद्र- द्वितीय सदन(विधानपरिषद) वह शक्तिशाली संस्था है जो विधायी तंत्र में अंकुश और संतुलन बनाए रखने का कार्य करती हैं जो संवैधानिक सरकार के कार्यकरण के लिए परम आवश्यक माना जाता है ,इसलिए विधानपरिषद को संविधान का प्रहरी भी माना जाता है। इसका विशेष कारण यह है कि इस सदन को प्रदेश के सभी विषयों के विशेषज्ञों एवं विद्वानों का प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है।भारत के स्वाधीनता आंदोलन में उत्तर प्रदेश विधानपरिषद के कई सदस्यों का विशेष योगदान रहा है जिन्होंने राष्ट्रीय जागरण और आंदोलन को एक नई दिशा और गति प्रदान की। उक्त बातें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ भाजपा नेता डीसीएफ चेयरमैन सुरेन्द्र अग्रहरि ने पकरी में आयोजित स्नातक मतदाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में विधानपरिषद कुल 100 सीटे है जिसमे 38 सीट के लिए विधानसभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचन होता है , 36 सीट पर स्थानिय निकायों के प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचन होता है ।8 सीट पर ग्रेजुएट(स्नातक)मतदाताओं द्वारा निर्वाचन होता है , 8 सीट पर शिक्षक मतदाताओं द्वारा निर्वाचन होता है और शेष 10 सीटों पर राज्य के कला, साहित्य, विज्ञान, खेल , चिकित्सा में विषय विशेषज्ञों को राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते है। इस प्रकार विधानपरिषद जो विधानमंडल का उच्च सदन होता है ,उसमें विद्वानों का प्रतिनिधित्व होता है। इसलिए आप सभी लोग एक दिसम्बर को होने वाले स्नातक निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी खण्ड के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को प्रथम वरीयता का मत देकर जीत दिलाने में सहयोग करे । इस अवसर पर जमुना पनिका, मक्खन सिंह, अशोक कुमार सिंह, इन्द्रदेव गौतम, अजय कुमार, महेन्द्र यादव, सत्यनारायण , मेघनाथ भारती, धनंजय रावत, राजेन्द्र सिंह,पंकज गोस्वामी, उपेन्द्र यादव, अयोध्या प्रसाद, श्रवण कुमार यादव, रामदुलारे, लालमणि, विनय कुमार,मंदीप कुमार सहित कई लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन यमुना प्रसाद ने किया।।